Thursday, December 3, 2015
Monday, April 6, 2015
The wait is finally over
Dear Friends,
The much awaited release date of my next film Prem Ratan Dhan Payo (PRDP) has been announced. PRDP will be releasing on 11th November, 2015. The story of the film is very beautiful and I have tried my best to do justice to it. Writing dialogues for Soorajji's movie is always very challenging. Perfectionist that he is, I knew I had to give my best. Now waiting for this Diwali, for the magic to unfold.
Love,
Atal Kavi
The much awaited release date of my next film Prem Ratan Dhan Payo (PRDP) has been announced. PRDP will be releasing on 11th November, 2015. The story of the film is very beautiful and I have tried my best to do justice to it. Writing dialogues for Soorajji's movie is always very challenging. Perfectionist that he is, I knew I had to give my best. Now waiting for this Diwali, for the magic to unfold.
Love,
Atal Kavi
Monday, March 23, 2015
Wednesday, March 11, 2015
Thursday, December 11, 2014
My next film as a Director...
Dear All,
With this post, I would like to share with you something which is very special to me.
I have finalised the script for the next film which I shall be directing. The subject has been close to my heart for a long long time and I am glad it has shaped the way I wanted.
The details are being worked out and an official announcement shall be made very soon.
Love,
Atal Kavi
With this post, I would like to share with you something which is very special to me.
I have finalised the script for the next film which I shall be directing. The subject has been close to my heart for a long long time and I am glad it has shaped the way I wanted.
The details are being worked out and an official announcement shall be made very soon.
Love,
Atal Kavi
Thursday, November 6, 2014
Tuesday, August 19, 2014
Thursday, November 7, 2013
Saturday, January 12, 2013
Media, Part - 5 (Dhai Aakhar Hasya Ke)
लोग कहते हैं,
कि बारह साल बाद तो
घूरे के दिन भी बदलते हैं।
पर आज़ादी के साठ साल बाद भी
क़ानून की दशा नहीं सुधरी,
एक दिन प्रियदर्शनी मट्टू
और जेसिका लाल के हत्यारे
बारी-बारी हो गए बरी।
अंधे क़ानून के संकेत साफ थे
बड़े बाप के बेटों के
सौ खून भी माफ़ थे।
तब मीडिया आया आगे
और बोल-बहुत हो गया अब,
कानून को दिखे न दिखे
मुझे दिखता है सब।
फिर क्या था
रिपोर्टर, बाहुबलियों के
यूं हाथ धोकर के पीछे पड़े,
जैसे शोले फिल्म में
जय और वीरू
गब्बर के पीछे पड़े।
जब तक अदालत ने
एक हत्यारे को फांसी,
और दूसरे को उम्र कैद का
आदेश न दे दिया,
तब तक चैन से नहीं बैठा मीडिया।
फिर तो एक के बाद एक
सुखद जजमेंट आते रहे
जेठमलानी टाइप
वकालत के गाल पर
ऐसा थप्पड़ पड़ा
कि देर तक सहलाते रहे।
अब तो कोई बेटा
बदमाशी करता है
तो बाहुबली कहता है
बेटा बहुत पछताएगा
सुधर जा वरना
तेरा बाप मीडिया आ जाएगा।
कि बारह साल बाद तो
घूरे के दिन भी बदलते हैं।
पर आज़ादी के साठ साल बाद भी
क़ानून की दशा नहीं सुधरी,
एक दिन प्रियदर्शनी मट्टू
और जेसिका लाल के हत्यारे
बारी-बारी हो गए बरी।
अंधे क़ानून के संकेत साफ थे
बड़े बाप के बेटों के
सौ खून भी माफ़ थे।
तब मीडिया आया आगे
और बोल-बहुत हो गया अब,
कानून को दिखे न दिखे
मुझे दिखता है सब।
फिर क्या था
रिपोर्टर, बाहुबलियों के
यूं हाथ धोकर के पीछे पड़े,
जैसे शोले फिल्म में
जय और वीरू
गब्बर के पीछे पड़े।
जब तक अदालत ने
एक हत्यारे को फांसी,
और दूसरे को उम्र कैद का
आदेश न दे दिया,
तब तक चैन से नहीं बैठा मीडिया।
फिर तो एक के बाद एक
सुखद जजमेंट आते रहे
जेठमलानी टाइप
वकालत के गाल पर
ऐसा थप्पड़ पड़ा
कि देर तक सहलाते रहे।
अब तो कोई बेटा
बदमाशी करता है
तो बाहुबली कहता है
बेटा बहुत पछताएगा
सुधर जा वरना
तेरा बाप मीडिया आ जाएगा।
Media, Part - 4 (Dhai Aakhar Hasya Ke)
रिपोर्टर टी. वी. पर आया
और विधान सभा का
आंखों देखा हाल सुनाया,
आज विधान सभा में जमकर
सदस्यों ने एक दूसरे पर
जूते बरसाए
किसी के हिस्से में आए
किसी के हिस्से में नहीं आए।
जिनके हिस्से में आए
उन्होंने खाए
जिनके हिस्से में नहीं आए
उन्होंने नारे लगाए।
इस बीच किसी का निशाना
दे गया दगा
एक जूता अध्यक्ष महोदय
को जा लगा
मच गई हड़बड़ी
कार्रवाई रोकनी पड़ी।
सरकार ने तत्काल
जांच का आदेश दिया
अध्यक्ष महोदय ने
अभी तक जूता वापस नहीं किया
लखनऊ से मैं, दीपक सौरसिया।
और विधान सभा का
आंखों देखा हाल सुनाया,
आज विधान सभा में जमकर
सदस्यों ने एक दूसरे पर
जूते बरसाए
किसी के हिस्से में आए
किसी के हिस्से में नहीं आए।
जिनके हिस्से में आए
उन्होंने खाए
जिनके हिस्से में नहीं आए
उन्होंने नारे लगाए।
इस बीच किसी का निशाना
दे गया दगा
एक जूता अध्यक्ष महोदय
को जा लगा
मच गई हड़बड़ी
कार्रवाई रोकनी पड़ी।
सरकार ने तत्काल
जांच का आदेश दिया
अध्यक्ष महोदय ने
अभी तक जूता वापस नहीं किया
लखनऊ से मैं, दीपक सौरसिया।
Media, Part - 3 (Dhai Aakhar Hasya Ke)
दूरदर्शन ने
अपने विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत,
फ़सल को नुकसान -
पहुंचाने वाले कीड़ों की बाबत
वो दुर्लभ जानकारी दी,
जो किसान भाइयों को
पहले से ही थी।
आह ! दूरदर्शन
तू बिलकुल नहीं बदला
जो देखे, उसका भी भला,
जो नहीं देखे उसका भी भला।
अपने विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत,
फ़सल को नुकसान -
पहुंचाने वाले कीड़ों की बाबत
वो दुर्लभ जानकारी दी,
जो किसान भाइयों को
पहले से ही थी।
आह ! दूरदर्शन
तू बिलकुल नहीं बदला
जो देखे, उसका भी भला,
जो नहीं देखे उसका भी भला।
Monday, January 7, 2013
Back as Dialogue writer for Sooraj R Barjatya's next film
Dear Friends,
After a break of 6 years, I am back to dialogue writing and shall be penning the dialogues for Sooraj R Barjatya's next venture which shall star Salman Khan in the lead.
Shall keep you updated on the project.
Lots of Love and with Thanks,
Yours always,
Atal Kavi
After a break of 6 years, I am back to dialogue writing and shall be penning the dialogues for Sooraj R Barjatya's next venture which shall star Salman Khan in the lead.
Shall keep you updated on the project.
Lots of Love and with Thanks,
Yours always,
Atal Kavi
Friday, January 4, 2013
Media, Part - 2 (Dhai Aakhar Hasya Ke)
शहर के बीच
हाई-वे का सीन था
सीन प्रात:कालीन था
रिपोर्टर मुस्कुराया
और गर्व से बताया
" ये है एशिया का सबसे बड़ा
ओपन एयर शौचालय
और मैं हूँ अजय
आप देख रहे हैं
हमारा विशेष कार्यक्रम
हाई-वे के हम दम
हाथ में लोटा-डिब्बा लिए
लोग आ रहे हैं
जा रहे हैं
और वापस जा रहे हैं
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
वैसे तो हर जगह लड़ाई
हाई-वे पर भाई-भाई।"
इसके बाद रिपोर्टर ने
अपना रुख दूसरी तरफ किया
और एक हाई-वे के
हम दम का इंटरव्यू लिया
" आप यहां क्या कर रहे हैं?"
" जी मैं यहां क्या कर रहा हूं,
ये तो आप देख ही रहे हैं
पर आप यहां क्या कर रहे हैं?"
रिपोर्टर बोला -
" हम लाइव टेलीकास्ट कर रहे हैं
हमारा विशेष कार्यक्रम
हाई-वे के हमदम
इसमें आपका स्वागत है।"
हमदम बोला -
" हम तो यहां रोज आते हैं
आज आपका स्वागत है।
लेकिन ये तो कहो
आज फैशन शो की जगह, हमारा शो?
मजे से फिल्माओ, क्या लोकेशन है
हम धरती पुत्र -
और ये धरती पुत्रों का प्रात:कालीन
खुला अधिवेशन है।
रिपोर्टर ने पूछा -
" क्या आपको नहीं लगता कि आप
सरकारी नियम का उलंघन कर रहे हैं?"
" जी हम तो कुदरत के नियम का
पालन कर रहे हैं"
अब कुदरत के नियम का पालन करने से
सरकारी नियम टूटते हैं
तो हम क्या कर सकते हैं?"
रिपोर्टर ने इंटरव्यू आगे बढ़ाया
" ये हाई-वे कब से है?"
" जी दस साल से।"
" यहां आपका अधिवेशन
कब से चल रहा है?"
" जी महाभारत काल से,
पहले यहां एक गांव था
एक दिन शहर आ पहुंचा टहलता हुआ
और गांव का अपहरण कर लिया
हमने भी आधुनिकता के सामने
समर्पण कर दिया
नतीजा सामने है, देख लिया?
शहर ने हमारा
और हमने शहर का
हुलिया बिगाड़ के रख दिया।"
तभी न्यूज रीडर ने सवाल किया
" अजय ! ख़राब मौसम या बरसात के दिन
बाधा पहुंचाते हैं
क्या तब भी ये लोग रोज आते हैं?
बोला अजय - " बरसात हो या प्रलय
रोज आना पड़ता है
आदमी खाए बिना रह सकता है
नहाए बिना रह सकता है
लेकिन आये बिना -
एक दिन से अधिक नहीं रह सकता संजय,"
संजय बोला -
" इस जानकारी के लिए
शुक्रिया अजय।"
अंतिम सवाल किया रिपोर्टर ने-
" क्या कारण है कि शहर में
आप न शरमाते हैं, न लजाते हैं
इस तरह खुले में बैठ जाते हैं
जबकि गांव में-आज भी
लोक लाज निभाते हैं?"
हम दम बोला-
"गांव में एक दुसरे को जानते हैं
इसलिए करते हैं लाज
यहां जान पहचान ही नहीं
तो काहे की लाज
और किसका लिहाज़
गांव में संस्कार था
शहर में रोजगार था
रोजगार के लिए गांव छूटा
तो आंखों की शर्म रही जाती,
वहां पगड़ी उतारने में
आती थी शर्म
यहां कपड़े उतारने में नहीं आती।"
हाई-वे का सीन था
सीन प्रात:कालीन था
रिपोर्टर मुस्कुराया
और गर्व से बताया
" ये है एशिया का सबसे बड़ा
ओपन एयर शौचालय
और मैं हूँ अजय
आप देख रहे हैं
हमारा विशेष कार्यक्रम
हाई-वे के हम दम
हाथ में लोटा-डिब्बा लिए
लोग आ रहे हैं
जा रहे हैं
और वापस जा रहे हैं
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
वैसे तो हर जगह लड़ाई
हाई-वे पर भाई-भाई।"
इसके बाद रिपोर्टर ने
अपना रुख दूसरी तरफ किया
और एक हाई-वे के
हम दम का इंटरव्यू लिया
" आप यहां क्या कर रहे हैं?"
" जी मैं यहां क्या कर रहा हूं,
ये तो आप देख ही रहे हैं
पर आप यहां क्या कर रहे हैं?"
रिपोर्टर बोला -
" हम लाइव टेलीकास्ट कर रहे हैं
हमारा विशेष कार्यक्रम
हाई-वे के हमदम
इसमें आपका स्वागत है।"
हमदम बोला -
" हम तो यहां रोज आते हैं
आज आपका स्वागत है।
लेकिन ये तो कहो
आज फैशन शो की जगह, हमारा शो?
मजे से फिल्माओ, क्या लोकेशन है
हम धरती पुत्र -
और ये धरती पुत्रों का प्रात:कालीन
खुला अधिवेशन है।
रिपोर्टर ने पूछा -
" क्या आपको नहीं लगता कि आप
सरकारी नियम का उलंघन कर रहे हैं?"
" जी हम तो कुदरत के नियम का
पालन कर रहे हैं"
अब कुदरत के नियम का पालन करने से
सरकारी नियम टूटते हैं
तो हम क्या कर सकते हैं?"
रिपोर्टर ने इंटरव्यू आगे बढ़ाया
" ये हाई-वे कब से है?"
" जी दस साल से।"
" यहां आपका अधिवेशन
कब से चल रहा है?"
" जी महाभारत काल से,
पहले यहां एक गांव था
एक दिन शहर आ पहुंचा टहलता हुआ
और गांव का अपहरण कर लिया
हमने भी आधुनिकता के सामने
समर्पण कर दिया
नतीजा सामने है, देख लिया?
शहर ने हमारा
और हमने शहर का
हुलिया बिगाड़ के रख दिया।"
तभी न्यूज रीडर ने सवाल किया
" अजय ! ख़राब मौसम या बरसात के दिन
बाधा पहुंचाते हैं
क्या तब भी ये लोग रोज आते हैं?
बोला अजय - " बरसात हो या प्रलय
रोज आना पड़ता है
आदमी खाए बिना रह सकता है
नहाए बिना रह सकता है
लेकिन आये बिना -
एक दिन से अधिक नहीं रह सकता संजय,"
संजय बोला -
" इस जानकारी के लिए
शुक्रिया अजय।"
अंतिम सवाल किया रिपोर्टर ने-
" क्या कारण है कि शहर में
आप न शरमाते हैं, न लजाते हैं
इस तरह खुले में बैठ जाते हैं
जबकि गांव में-आज भी
लोक लाज निभाते हैं?"
हम दम बोला-
"गांव में एक दुसरे को जानते हैं
इसलिए करते हैं लाज
यहां जान पहचान ही नहीं
तो काहे की लाज
और किसका लिहाज़
गांव में संस्कार था
शहर में रोजगार था
रोजगार के लिए गांव छूटा
तो आंखों की शर्म रही जाती,
वहां पगड़ी उतारने में
आती थी शर्म
यहां कपड़े उतारने में नहीं आती।"
Friday, November 30, 2012
Tuesday, August 28, 2012
Media, Part - 1 (Dhai Aakhar Hasya Ke)
खबर थी
एक बीमार नेता ने, लंदन में
अंतिम सांस ली।
उधर यमदूत नेता को लेकर
नरक पहुंचे भी नहीं
उससे पहले-चैनल का रिपोर्टर
लंदन पहुंच गया अपनी टीम लेकर
और नेता के बेटे का इंटरव्यू लिया-
" आपको कैसा लग रहा है?"
" जी मैं कुछ समझा नहीं, क्या कैसा लग रहा है?"
" आपके पिताजी के मरने की खबर सुनकर
आपको कैसा लग रहा है?"
" जी बहुत बुरा लग रहा है।"
" अंतिम सांस लेने से पहले
उन्होंने किसी दर्द या तकलीफ की शिकायत की थी।"
" जी नहीं डायरेक्ट अंतिम सांस ली थी"
" इससे पहले भी कभी
उन्होंने अंतिम सांस ली थी?"
" जी कोशिश तो की थी
लेकिन डाँक्टरों ने लेने नहीं दी।"
" अंतिम सांस लेने के बाद क्या हुआ?"
" जी अंतिम सांस लेने के बाद वे मर गए।"
" क्या उनको पता था
कि अंतिम सांस लेने के बाद वे मर जायेंगे?"
" जी पता था।"
" जब उनको पता था
कि अंतिम सांस लेने के बाद
वे मर जायेंगे
तो उन्होंने अंतिम सांस क्यों ली?"
" जी राष्ट्र हित में ली!"
" उन्होंने राष्ट्र हित में अंतिम सांस ली,
ये आप कैसे कह सकते हैं?"
" जी मैं ऐसे कह सकता है
कि उन्होंने जो भी काम किया,
वो या तो राष्ट्र हित में किया
या पार्टी के हित किया
अगर पार्टी के हित में
अंतिम सांस लेते
तो चुनाव से ठीक पहले लेते
सहानुभूति की लहर बनती
दो-चार सीटें ज्यादा मिलती
यानि पार्टी के हित में
अंतिम सांस नहीं ली
इसका ये मतलब हुआ
कि उन्होंने राष्ट्र हित में
अंतिम सांस ली।"
" वे लंदन क्यों आये थे?"
" जी अंतिम सांस लेने के लिए आये थे"
" वे ये अंतिम सांस
भारत में भी ले सकते थे।
इसके लिए इतना दूर क्यों आये?"
" जी राष्ट्र हित में आये।"
" आपने प्रधानमंत्री का
वो बयाँ पढ़ा है
जिसमें उन्होंने कहा है'
कि नेताजी के जाने से
राष्ट्र का बड़ा नुकसान हुआ है।"
" जी पढ़ा है।"
" आप कह रहे हैं
कि उन्होंने राष्ट्र हित में अंतिम सांस ली,
और प्रधानमंत्री कह रहे हैं
कि उनके जाने से
राष्ट्र का बड़ा नुकसान हुआ है।
अब सवाल ये उठता है
कि राष्ट्र हित में अंतिम सांस ली
तो राष्ट्र का नुकसान कैसे हुआ?
फ़ायदा होना चाहिए।
फ़ायदा हुआ है
तो कितना हुआ है?
ये प्रधानमंत्री को
बताना चाहिए।
और क्या इस परंपरा को
आगे बढाया जाना चाहिए?
सरकारी खर्चे पर
डायलेसिस के सहारे जीवित
निकम्मे नेताओं को
राष्ट्र हित में-मरने के लिए
आगे आना चाहिये?"
" बहरहाल -
ये हैं कुछ अनसुलझे सवाल।"
वो आंधी की तरह आया
और तूफ़ान की तरह छा गया
कुछ सवाल किये
और जवाब लिए बिना ही
ब्रेक पर चला गया।
एक बीमार नेता ने, लंदन में
अंतिम सांस ली।
उधर यमदूत नेता को लेकर
नरक पहुंचे भी नहीं
उससे पहले-चैनल का रिपोर्टर
लंदन पहुंच गया अपनी टीम लेकर
और नेता के बेटे का इंटरव्यू लिया-
" आपको कैसा लग रहा है?"
" जी मैं कुछ समझा नहीं, क्या कैसा लग रहा है?"
" आपके पिताजी के मरने की खबर सुनकर
आपको कैसा लग रहा है?"
" जी बहुत बुरा लग रहा है।"
" अंतिम सांस लेने से पहले
उन्होंने किसी दर्द या तकलीफ की शिकायत की थी।"
" जी नहीं डायरेक्ट अंतिम सांस ली थी"
" इससे पहले भी कभी
उन्होंने अंतिम सांस ली थी?"
" जी कोशिश तो की थी
लेकिन डाँक्टरों ने लेने नहीं दी।"
" अंतिम सांस लेने के बाद क्या हुआ?"
" जी अंतिम सांस लेने के बाद वे मर गए।"
" क्या उनको पता था
कि अंतिम सांस लेने के बाद वे मर जायेंगे?"
" जी पता था।"
" जब उनको पता था
कि अंतिम सांस लेने के बाद
वे मर जायेंगे
तो उन्होंने अंतिम सांस क्यों ली?"
" जी राष्ट्र हित में ली!"
" उन्होंने राष्ट्र हित में अंतिम सांस ली,
ये आप कैसे कह सकते हैं?"
" जी मैं ऐसे कह सकता है
कि उन्होंने जो भी काम किया,
वो या तो राष्ट्र हित में किया
या पार्टी के हित किया
अगर पार्टी के हित में
अंतिम सांस लेते
तो चुनाव से ठीक पहले लेते
सहानुभूति की लहर बनती
दो-चार सीटें ज्यादा मिलती
यानि पार्टी के हित में
अंतिम सांस नहीं ली
इसका ये मतलब हुआ
कि उन्होंने राष्ट्र हित में
अंतिम सांस ली।"
" वे लंदन क्यों आये थे?"
" जी अंतिम सांस लेने के लिए आये थे"
" वे ये अंतिम सांस
भारत में भी ले सकते थे।
इसके लिए इतना दूर क्यों आये?"
" जी राष्ट्र हित में आये।"
" आपने प्रधानमंत्री का
वो बयाँ पढ़ा है
जिसमें उन्होंने कहा है'
कि नेताजी के जाने से
राष्ट्र का बड़ा नुकसान हुआ है।"
" जी पढ़ा है।"
" आप कह रहे हैं
कि उन्होंने राष्ट्र हित में अंतिम सांस ली,
और प्रधानमंत्री कह रहे हैं
कि उनके जाने से
राष्ट्र का बड़ा नुकसान हुआ है।
अब सवाल ये उठता है
कि राष्ट्र हित में अंतिम सांस ली
तो राष्ट्र का नुकसान कैसे हुआ?
फ़ायदा होना चाहिए।
फ़ायदा हुआ है
तो कितना हुआ है?
ये प्रधानमंत्री को
बताना चाहिए।
और क्या इस परंपरा को
आगे बढाया जाना चाहिए?
सरकारी खर्चे पर
डायलेसिस के सहारे जीवित
निकम्मे नेताओं को
राष्ट्र हित में-मरने के लिए
आगे आना चाहिये?"
" बहरहाल -
ये हैं कुछ अनसुलझे सवाल।"
वो आंधी की तरह आया
और तूफ़ान की तरह छा गया
कुछ सवाल किये
और जवाब लिए बिना ही
ब्रेक पर चला गया।
Sunday, August 26, 2012
Sunday, August 12, 2012
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